तो पर उस समय गंगा मां की आरती की तैयारी चल रही थी। कुछ मंत्रो के उच्चारण हो रहे थे। तत्पश्चात काशी विश्वनाथ, गंगा मईया का नारा लगाकर आरती शुरू की गई।
आरती शुरू होने से पहले शंखनाद हुआ। शंखनाद होने पर कानों को एक अलग सा सुकून मिला। मंत्र उच्चारण के साथ आरती होने लगी। 10 - 15 मिनट आरती हुई। इसके बाद एक बार पुनः शंखनाद हुआ। तत्पश्चात एकत्रित हुए सभी लोगो को गंगा मैया में पुष्प विषर्जन के लिए कहा गया। पुष्प विषर्जन के बाद लाइन लगाकर सभी लोग आरती और प्रशाद के लिए खड़े हुए। बारी - बारी सबको प्रशाद मिलता गया। तत्पश्चात सभी लोग अपने - अपने कर्तव्य को गए। मैं थोड़ी देर रुक कर कुछ फोटो क्लिक किए।
ठंड ज्यादा होने के कारण मैं भी अपने घर के लिए निकल पड़ा।
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